बेसल अभिसमय Basel Convention

धातु के टुकड़े, रासायनिक अपशिष्ट और अवमल (sludge) जैसे अपशिष्ट पदार्थ हानिकारक हो सकते हैं। 1980 के दशक में इन अपशिष्ट पदार्थों का विकासशील देशों में ढेर लगाने के आपत्तिजनक आचरण के लये विकसित देशों की निंदा की गई। पर्यावरणवादियों के बढ़ते दबावों के कारण 1989 में बेसल (स्विट्जरलैंड) में हानिकारक अपशिष्टों के सीमा पार आवागमन और उनके प्रबंधन के लिये अभिसमय पर हस्ताक्षर हुए। इस अभिसमय के अंतर्गत अपशिष्ट पदार्थों को अनेक वर्गों में विभाजित किया गया तथा विकसित देशों के लिए अपशिष्ट पदार्थों को दक्षिणी देशों में भेजने से पूर्व विज्ञप्ति जारी करना बाध्यकारी कर दिया गया। लेकिन इस अभिसमय में एक त्रुटि रह गई; पुनर्चक्रण (recycling) के लिये अपशिष्ट पदार्थों के आवागमन को स्वीकार कर लिया गया। इससे इन पदार्थों के ढेर लगाने की व्यवस्था को प्रोत्साहन मिला। 1994 में बेसल अभिसमय के सभी पक्षकारों ने सर्वसम्मति से दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए-(i) अंतिम निपटारे के लिए अपशिष्ट पदार्थों के निर्यात पर तात्कालिक प्रभाव से प्रतिबंध, तथा; (ii) 1 जनवरी, 1998 से पुनर्चक्रण के लिये अपशिष्ट पदार्थों के निर्यात पर प्रतिबंध।

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