बंगलौर या बेंगुलुरु Bangalore or Bengaluru

बैंगलोर दक्षिण भारत स्थित कर्नाटक राज्य की राजधानी है| इससे पहले यह मैसूर रियासत की राजधानी था| इस शहर की स्थापना केम्पे गौड़ा (Kempe Gowda), जो की विजयनगर साम्राज्य के एक सैन्य अधिकारी (अमरनायक) थे,  द्वारा सोलहवीं सदी में के प्रारंभ में की गयी थी| इस प्रकार इस शहर की उत्पत्ति, सैन्य सामंतवाद के अन्दर ही एक शहर के रूप में ही हुई थी| विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद, यह शहर मैसूर के वाडीयार राजवंश की राजधानी बना, वाडीयार वंश के बाद इनके उत्तराधिकारी हैदर अली और उसके बेटे टीपू सुल्तान की भी राजधानी रहा| 1799 में तीसरे मैसूर युद्ध में अंग्रेजों से टीपू की हार के बाद, मैसूर अंग्रेजों की कठपुतली महाराजाओं के शासन में रहा| बीसवीं सदी में इन महाराजाओं ने राज्य में उद्योगों के विकास के लिए अधिक ध्यान समर्पित किया, जिससे बैंगलोर का विकास भी संभव हुआ| भारत के महान उद्योगपति जमशेदजी नसरवानजी टाटा (Jamsetji Nusserwanji Tata ,1839-1904) के प्रयासों से यहाँ भारतीय विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Science) ने 1907 से कम करना शुरू किया| टाटा ने इसकी स्थापना भारतीय उद्योग के लिए अनुसंधान और विकास के एक केंद्र के रूप में की थी, परन्तु भारतीय उद्योग ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अधीन प्रगति नहीं कर सकता था, अतः इस संस्थान मौलिक अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित किया| नोबेल पुरस्कार विजेता सी वी रमन (C. V. Raman,1888–1970) भी यहाँ कम कर चुके हैं|

बैंगलोर दक्कन के पठार पर समुद्र तल से 949 मी. या 3,113 फिट की ऊँचाई पर स्थित है| यह भारत के महानगरों में सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित है| यहाँ की अच्छी जलवायु ज्यादातर उद्योगपतियों को आकर्षित करती है| यहाँ का औसत तापमान गर्मियों में 34°C और सर्दियों में 16°C रहता है| बैंगलोर में वार्षिक वर्षा काफी कम मात्र 36 इंच या 914 मिमी. ही होती है, अतः यहाँ पानी कावेरी नदी से उपलब्ध कराया जाता है| यहाँ की प्रमुख भाषा कन्नड़ है| इसके आलावा यहाँ तमिल और तेलुगु भाषाएँ भी बोली जाती है| द्वितीय विश्व युद्ध से पहले यहाँ हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड (Hindustan Aircraft Limited-HAL) स्थापित किया गया, जिसने ब्रिटेन के युद्ध के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई| आजादी के बाद भारत सरकार ने यहाँ हिन्दुस्तान मशीन टूल्स (Hindustan Machine Tools) की स्थापना की| निजी क्षेत्र में, एक संयुक्त उद्यम (MICO) जर्मन कंपनी की बॉश (Bosch) और हैदराबाद के निजाम द्वारा ऑटोमोबाइल विनिर्माण, विशेष रूप से स्पार्क प्लग के लिए शुरू किया गया| विभिन्न इंजीनियरिंग उद्योगों के आलावा  बंगलौर ने उत्कृष्ट रेशम के उत्पादन के एक केंद्र के रूप में अपनी प्रतिष्ठा को बनाए रखा है| सूचना प्रौद्योगिकी के उदय के साथ, बैंगलोर भारत में सॉफ्टवेयर उत्पादन का महानगर (Silicon Valley of India) भी बन गया| यहाँ विप्रो, इंफोसिस जैसी कंपनियों और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मुख्यालय भी है| यह भारत में विदेशी कंपनियों के लिए ‘आउटसोर्सिंग’ का प्रमुख केंद्र भी है| यहाँ भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (Bharat Electronics Limited, BEL) और नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (National Aerospace Laboratories, NAL) जैसी कम्पनियाँ भी हैं|

बैंगलोर में कई प्रतिष्ठित शिक्षण संसथान जैसे भारतीय विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Science, IISc), भारतीय प्रबंध संस्थान (Indian Institute of Management Bangalore, IIMB), भारतीय राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (National Law School of India University, NLSIU), नॅशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसांइसेस (National Institute of Mental Health and Neurosciences, NIMHANS) भी हैं|

बैंगलोर कन्नड़ फिल्म उद्योग का भी प्रमुख केंद्र है| यह भारत के GDP में सर्वाधिक योगदान करने वाले शीर्ष 15 शहरों में से एक है|

कैंपे गौड़ा ने 1537 में जब बंगलौर की स्थापना की, उस समय उसने एक छोटे किले का निर्माण कराया। इस किले के अवशेष अभी भी मौजूद हैं जिसका दो शताब्दियों के बाद हैदर अली ने पुनर्निर्माण कराया और टीपू सुल्तान ने उसमें और सुधार कार्य करवाया, साथ ही कैंपे गौड़ा ने गवीपुरम में गवी गंगाधरेश्वरा मंदिर और बासवा में बसवांगुड़ी मंदिर की स्थापना की| ये स्थल आज भी दर्शनीय है।

शहर के मध्य 1864 में निर्मित कब्बन पार्क और संग्रहालय देखने के योग्य है। जिसकी नीवं 1760 में हैदर अली ने राखी थी| इस पार्क की खूबसूरती के कारण ही बैंगलोर को ‘गार्डन सिटी (garden city)’ भी कहा जाता है|

1956 में नियो-द्रविडियन शैली पर निर्मित विधान सौधा या कर्नाटक की विधान सभा, भारत का सबसे बड़ा विधान सभा भवन है|

लाल बाग़ का निर्माण भी हैदर अली और टीपू सुल्तान द्वारा कराया गया था| अपने खुबसूरत गुलाबों और हरियाली के कारण इसे लाल्बघ कहते हैं| यहाँ एक ग्लास हाउस भी है|

इसके अलावा गांधी जी के जीवन से संबंधित गांधी भवन, टीपू सुल्तान का सुमेर महल, बाँसगुड़ी तथा हरे कृष्ण मंदिर, बंगलौर पैलेस साईं बाबा का आश्रम, नृत्यग्राम, बनेरघाट अभयारण्य यहाँ के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं|

दिसम्बर 2005 में कर्नाटक सरकार ने, ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता यू आर अनंतमूर्ति के, बैंगलोर का नाम बदलकर बेंगुलुरु करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, और 1 नवंबर 2006 को शहर का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर बेंगलूरु कर दिया गया| 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की जनसँख्या 8,425,970 है|

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