एंडियन राष्ट्र समुदाय Andean Community

यह समुदाय औद्योगिक, कृषिक, सामाजिक और व्यापारिक सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए पांच दक्षिण अमेरिकी देशों को एक मंच पर लाता है।

औपचारिक नाम: कम्यूनिडैड एण्डीना डी नेसीयोंस [Comunidad Andina de Naciones (CAN–Spanish)]

मुख्यालय: लीमा (पेरू)।

सदस्यता: बोलीविया, कोलम्बिया, इक्वाडोर, पेरू (वेनेजुएला 1978-2006 के बीच सदस्य था)।

सहायक सदस्य: चिली, अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और उरुग्वे।

पर्यवेक्षक देश: स्पेन।

आधिकारिक भाषा: स्पेनिश।

उद्भव एवं विकास

एंडियन राष्ट्र समुदाय (The Andean Community of Nations-CAN) का गठन एंडियन समूह के रूप में 1969 में बोलीविया, चिली, कोलम्बिया, इक्वाडोर और पेरू द्वारा उप-क्षेत्रीय एकीकरण समझौते (अथवा कार्टजेना समझौता) पर हस्ताक्षर के साथ हुआ। एंडियन संधि, एंडियन साझा बाजार (Ancom) आदि अनेक नामों से ज्ञात इस समूह में ऐसे लैटिन अमेरिकी देश सम्मिलित थे, जिनकी आर्थिक स्थिति अन्य लैटिन अमेरिकी देशों के अनुरूप थी। वेनेजुएला 1973 में इस समूह का सदस्य बना, जबकि पनामा 1979 में एक सहायक सदस्य के रूप में इस संगठन से जुड़ा। चिली 1976 में इससे अलग हो गया। वर्ष 1997 में पनामा ने इसकी पूर्ण सदस्यता ग्रहण की तथा पेरू ने इस समूह से पांच वर्षों के लिये अलग हो जाने की घोषणा की।

मूल कार्टेजेना संधि में कई प्रोटोकॉलों-लीमा प्रोटोकॉल, 1976; निर्णय 117(1977); ऐरेक्वीपा (पेरू) प्रोटोकॉल, 1978; क्विटी (इक्वाडोर) प्रोटोकॉल, 1987, और; कार्टजेना संधि में संशोधन के लिये प्रोटोकॉल (ट्रजिलो अधिनियम) 1996, के माध्यम से परिवर्तन लाये गये हैं। 1997 से प्रभावी ट्रजिलो अधिनियम पर बोलीविया, कोलम्बिया, इक्वाडोर, पेरू और वेनेजुएला ने सदस्यों तथा पनामा ने पर्यवेक्षक के रूप में हस्ताक्षर किये। इस अधिनियम में यह प्रावधान किया गया कि एंडियन उप-क्षेत्रीय एकीकरण लाने के लिये एक नये कानूनी ढांचे-एंडियन एकीकरण प्रणाली (एसएआई), के अंतर्गत सीएएन एंडियन समूह का स्थान ले सकता है।

उद्देश्य

इस समुदाय के मुख्य उद्देश्य हैं- सदस्य देशों के मध्य संतुलित और सामंजस्यपूर्ण विकास को प्रोत्साहन देना; आर्थिक एकीकरण के द्वारा विकास में तेजी लाना, तया; उप-क्षेत्रीय साझा बाजार की स्थापना के लिये अनुकूल वातावरण तैयार करना।

संरचना

ट्रजिलो प्रोटोकॉल, जिसके अंतर्गत एसएआई का गठन हुआ, के अनुसार सीएएन की संगठनात्मक संरचना में अध्यक्षीय परिषद्, विदेश मंत्री परिषद्,  एंडियन संसद, न्यायालय, लैटिन एम्रिका आरक्षित कोश, एंडियन विकास निगम तथा सचिवालय सम्मिलत हैं।

अध्यक्षीय परिषद में सभी सदस्य देशों के राष्ट्रपति सम्मिलित होते हैं। यह सीएएन का सबसे शक्तिशाली अंग होता है, जिसकी क्षेत्रीय एकीकरण के लिये निदेश (directives) जारी करने के उद्देश्य से नियमित बैठक होती है। विदेश मंत्रियों की परिषद सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से बनी होती है तथा अध्यक्षीय परिषद के निर्णयों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, एकीकरण की प्रक्रिया में समन्वय स्थापित करने तथा एक सामूहिक विदेश नीति विकसित करने के लिये वर्ष में इसकी दो बैठकें होती हैं ! सभी निर्णय आम सहमति के आधार पर लिये जाते हैं। आयोग में प्रत्येक सदस्य देश का एक अधिकृत दूत सम्मिलित रहता है। आयोग के प्रमुख कार्य हैं- समुदाय के उद्देश्यों की पूर्ति के लिये आवश्यक कदमों को अपनाना; सहभागी देशों द्वारा इन उद्देश्यों की पूर्ति का पर्यवेक्षण करना; बजट को स्वीकृति देना तथा सदस्य देशों के अंशदान का निर्धारण करना; बोलीविया तथा इक्वाडोर, जिन्हें अधिमान्य दर्जा प्रदान किया गया है, पर विशेष ध्यान देना। वर्ष में आयोग की सामान्यतया तीन बैठकें होती हैं। इसमें अधिकांश निर्णय पूर्ण बहुमत के आधार पर लिये जाते हैं! सेंटा फी डे बोगोटा (कोलम्बिया) में अवस्थित एंडियन संसद सीएएन का विचारण मण्डल (deliberative body) है तथा समुदाय के लोगों का प्रतिनिधित्व करती है। इसका गठन 1979 में हुआ तथा यह राष्ट्रीय विधानमंडलों के प्रतिनिधियों से बनी होती है।

महासचिवालय ने पुराने बोर्ड (जुंटा) का स्थान ले लिया है। सचिवालय का प्रधान अधिकारी महासचिव होता है, जिसकी नियुक्ति पांच वर्षों के लिये होती है। यह अधिशासी और तकनीकी कार्य करता है तथा अन्य क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करता है।

एंडियन समूह ने 1979 में न्यायालय का गठन किया, जिसने 1984 से कार्य करना प्रारम्भ किया। क्विटो में अवस्थित एंडियन न्यायालय सदस्यों के मध्य उत्पन्न विवादों को सुलझाता है तथा विधानों की व्याख्या करता है। एंडियन समूह ने ही वित्तीय संस्थाओं- लैटिन अमेरिकी आरक्षित कोष (Fundo Latinoamericano de Reservas–FLAR) एंडियन विकास निगम (Corporacion Andina de Fomento—CAF), का भी गठन किया। सचिवालय के सहयोग से इन संस्थाओं को एसएआई में एकीकृत कर दिया गया है। भुगतान असंतुलन से त्रस्त सदस्य देशों की सहायता करने के लिये 1978 में एफएलएआर का गठन किया गया, जबकि एकीकरण प्रयासों में तेजी लाने के लिये 1970 में सीएएफ की स्थापना की गई। इनके अतिरिक्त व्यापार मुद्रा, विनिमय, आर्थिक नियोजन, पर्यटन एवं सामाजिक मामलों के लिए कई परिषदें कार्यरत हैं।

गतिविधिया

सीएएन अपने कई दीर्वकालीन उद्देश्यों को प्राप्त करने में बहुत सफल नहीं रहा है। सदस्य देशों के मध्य आन्तरिक विवादों से कई प्रस्तावित गतिविधियां विलंबित होती रही हैं। विदेशी निवेश की सीमा पर महत्वपूर्ण विवाद उत्पन्न हुआ। 1971 में अपनाये गये एंडियन निवेश कोड के अंतर्गत विदेशी स्वामित्व वाले उपक्रमों को 50 प्रतिशत से कम विदेशी निवेश वाली संयुक्त कम्पनियों में परिवर्तित करने का प्रावधान था, ताकि ऐसे उपक्रम एंडियन समूह की आयात कर रियायतों का लाभ उठा सकें। चिली 1976 में इस समूह से अलग हो गया क्योंकि उसने एक ऐसा घरेलू कानून बनाया, जो एंडियन निवेश कोड का उल्लंघन करता था। क्विटो प्रोटोकॉल, 1987 ने इस कोड के कई प्रावधानों को निरस्त कर दिया तथा सदस्य देश विदेशी निवेश के क्षेत्र में निजी कानून बनाने के लिये स्वतंत्र हो गये। लेकिन विदेशी ऋण के स्थान पर विदेशी निवेश को प्रोत्साहन दिए जाने के सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्धता के बावजूद सदस्यों ने विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में बहुत कम उत्साह प्रदर्शित किया। क्विटो प्रोटोकॉल ने एंडियन समुदाय के कई मूल उद्देश्यों में भी परिवर्तन किए, जैसे-सीमा शुल्क संघ की स्थापना और महत्वाकांक्षी औद्योगिक परियोजनाओं का विकास। जब सदस्यों ने ऐसा अनुभव किया कि एकीकरण लाने में क्विटो प्रोटोकॉल लगभग असफल सिद्ध हो गया है, तब अन्तरा-क्षेत्रीय व्यापार अवरोधों को समाप्त करने तथा आयात शुल्क् छूट व्यवस्था के बेहतर क्रियान्वयन के लिये 1989 में कार्टजेना घोषणा-पत्र जारी किया गया।

साझा बाजार स्थापित करने की दिशा में पहले कदम के रूप में 1 जनवरी, 1992 को एंडियन मुक्त व्यापार क्षेत्र (काराकस, वेनेजुअला, समझौता, 1991 के आधार पर) का गठन किया गया। लेकिन सभी देशों ने पारस्परिक आयात शुल्क व्यवस्था को समाप्त नहीं किया। फिर 1992 में पेरू के राष्ट्रपति के तख्ता-पलट तथा वेनेजुएला, बोलीविया तथा इक्वाडोर के एकीकरण के प्रति सामान्य निरुत्साह ने एंडियन एकीकरण की संकट में डाल दिया।

फिर भी, 1992-95 की अवधि में समुदाय ने आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति अर्जित की। 1995 में एक बाह्य आयात शुल्क व्यवस्था प्रभाव में आई, जिसमें क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत नियतिों को सम्मिलित करने का प्रावधान था, यद्यपि इस व्यवस्था में पेरू, बोलीविया और इक्वाडोर को कुछ छूट प्रदान की गई।

10 मार्च, 1996 को ट्रजिलो (पेरू) में हस्ताक्षरित ट्रजिलो अधिनियम में नई संरचना-एसएआई, के अंतर्गत सदस्यों के मध्य आर्थिक, वाणिज्यिक और राजनीतिक एकीकरण लाने के लिये एंडियन संस्थाओं के व्यापक पुनर्गठन और कार्टजेना समझौते के प्रोटोकॉल में संशोधन के प्रावधान हैं। सीएएन ने मकॉसुर (MERCOSUR) के साथ मुक्त व्यापार संबंध स्थापित करने के लिये भी औपचारिक वार्ताएं शुरू कर दी हैं।

सीएएन ईयू के साथ भी महत्वपूर्ण विचार-विमर्श करता है। 1983 में एंडियन समूह ने व्यापार अवरोधों को दूर करने तथा सहयोग कार्यक्रमों को प्रोत्साहन देने के लिये ईईसी के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए। 1993 में एंडियन समूह और ईईसी के बीच पुनः एक संधि हुई, जिसमें अन्य विषयों के अतिरिक्त सामाजिक विकास परियोजनाओं के क्षेत्र में भी सहयोग स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।

सीएएन का भविष्य मुख्य रूप से सदस्य देशों के व्यक्तिगत, राजनीतिक और आर्थिक वातावरण तथा लैटिन अमेरिकी क्षेत्र के समग्र राजनीतिक एवं आर्थिक वातावरण पर निर्भर करता है।

वर्ष 2003 से, एकीकरण प्रक्रिया को सामाजिक सामग्री भी दी गई थी सामाजिक विकास की एक एकाकी योजना स्थापित की गई और विकास मामलों, जिन्हें प्रक्रिया की शुरुआत में प्रस्तुत किया गया और बाद में छोड़ दिया गया, को फिर से सामने लाया गया।

वर्ष 2005 में एंडीयन पासपोर्ट के सृजन से व्यक्तियों के आवागमन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।

1 जनवरी, 2005 से, एंडीयन समुदाय के सदस्य देशों के नागरिक बिना वीजा के एक-दूसरे के यहां आ-जा सकते थे। यात्रियों की अधिकारियों को अपने राष्ट्रीय पहचान-पत्र दिखाने की जरूरत होती है।

1997 में, एंडियन मुक्त व्यापार क्षेत्र में धीरे-धीरे पेरू को शामिल करने का एक समझौता हुआ। 1998 में, ब्युनस आयर्स में एंडीयन समुदाय और मर्कोसुर के बीच मुक्त व्यापार क्षेत्र के सृजन के एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

एंडीयन समुदाय और मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका के दो मुख्य व्यापार गुटों को रखते हैं। 1999 में, इन संगठनों ने दक्षिण अमेरिका मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) के सृजन की दृष्टि से विलय की बातचीत शुरू की। 8 दिसंबर, 2004 को, एंडियन राष्ट्र समुदाय (सीएएन) ने मर्कोसुर के साथ एक सहयोग समझौता किया। इसे मई 2008 तक ब्रासीलिया में संधि करके स्थापित किया गया।

अप्रैल 2006 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज ने घोषणा की कि वेनेजुएला एंडियन समुदाय से अपनी सदस्यता का त्याग करेगा क्योंकि कोलम्बिया एवं पेरू द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करने से समुदाय को अतुलनीय नुकसान होगा।

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