विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अपीलीय ट्रिब्यूनल Airports Economic Regulatory Authority Appellate Tribunal

विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अपीलीय ट्रिब्यूनल (एईआरएएटी) की स्थापना विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 के अंतर्गत दो या अधिक सेवा प्रदाताओं के बीच किसी विवाद या सेवा प्रदाताओं और उपभोक्ता के समूह के बीच किसी विवाद के अधिनिर्णयन के लिए और विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण के किसी निर्देश, निर्णय या आदेश के विरुद्ध किसी अपील को सुनने एवं इसका निपटान करने के लिए की गई है।

अपीलीय ट्रिब्यूनल दोनों पक्षों को सुनने का अवसर देने के पश्चात् ऐसा आदेश दे सकता है जो वह सही समझे कोई व्यक्ति जो जानबूझकर अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेश की अनुपालना नहीं करता है उस पर जुर्माना आरोपित किया जाएगा जो 1 लाख रुपए तक हो सकता है और दूसरी एवं निरंतर अपराध की स्थिति में यह दो लाख रुपए तक हो सकता है और निरंतर उल्लंघन की स्थिति में इसमें अतिरिक्त जुर्माना जो दो लाख रुपए प्रतिदिन तक का हो सकता है। ट्रिब्यूनल के आदेश के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकती है। किसी भी न्यायालय को किसी भी मामले एवं प्रक्रिया को देखने का अधिकार नहीं होगा जिसे अधिनियम के अंतर्गत देखने की अधिकारिता अपीलीय ट्रिब्यूनल की होगी।

अपीलीय ट्रिब्यूनल में एक अध्यक्ष एवं दो से अनधिक सदस्य होगे जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी।

विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण

विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (एईआरए) की स्थापना मई, 2009 में भारत सरकार द्वारा की गई। प्राधिकरण में एक अध्यक्ष एवं दो अन्य सदस्य होते हैं जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा वैमानिकी, कानून, अर्थव्यवस्था, वाणिज्य या उपभोक्ता मामलों का ज्ञान एवं पेशेवर अनुभव रखने वाले योग्य लोगों में से की जाएगी।

भृत्य विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 में उल्लिखित उपबंधों के अनुरूप एईआरए के निम्न संविधिक कृत्य हैं-

  1. प्रमुख विमानपत्तनों के संबंध में विकास शुल्क की राशि का निर्धारण करना।
  2. विमान नियम, 1937 के नियम 88 के अंतर्गत आरोपित यात्री सेवा शुल्क की राशि का निर्धारण करना
  3. सेवा गुणवत्ता, निरंतरता एवं विश्वसनीयता से सम्बद्ध तय निष्पादन मानकों, जैसा कि केंद्र सरकार या अन्य प्राधिकृत प्राधिकरण द्वारा विशेषित किया गया हो, की निगरानी करना।
  4. उपबंध (a) के तहत्शुल्कों के निर्धारण हेतुऐसी सूचनामांगना जो आवश्यक हो।
  5. शुल्क से सम्बद्ध अन्य ऐसे कृत्य, जो केंद्र सरकार द्वारा इसे सौंपे गए हों या इस अधिनियम के प्रावधानों की पूर्ति के लिए अत्यावश्यक हों।
  6. वैमानिकी सेवाओं के शुल्कों के निर्धारण में ध्यान रखा जाता है-
  • पूंजीगत व्यय को उठाना और विमानपत्तन सुविधाओं के सुधार में समयबद्ध निवेश करना
  • प्रदान की गई सेवा की गुणवत्ता एवं अन्य सम्बद्ध कारक
  • कार्यक्षमता के सुधार की लागत
  • बड़े एवं प्रमुख विमानपत्तनों का मितव्ययी एवं सक्षम संचालन
  • वैमानिकी सेवाओं के अतिरिक्त सेवाओं से प्राप्त राजस्व
  • केंद्र सरकार द्वारा किसी समझौते, सहमति या एमओयू में किसी प्रकार की रियायत
  • अन्य कोई कारक जो इस अधिनियम के उद्देश्यों के लिए प्रासंगिक हो सकता है।

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