अफ्रीकी विकास बैंक African Development Bank Group - AfDB

यह बैंक विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता, लोक एवं निजी निवेश की सहायता तथा आर्थिक सहयोग की प्रेरणा देकर सदस्य देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास में तेजी लाता है।

औपचारिक नाम: बैंक अफ्रीकैने डी डिवलपमेंट (Banque Africaine de Developpement– BAD)

मुख्यालयः आबिदजान (कोट डी' आइवरी)।

सदस्यता (क्षेत्रीय सदस्य): अल्जीरिया, मिस्र, लीबिया, मॉरीटॉनिया, मोरक्को, टयूनीशिया, बेनिन, बुर्कीना फासो, केप वर्डे, कोट डी आइवरी, गैम्बिया, घाना, गुनिया, गुनिया-बिसाऊ, लाइबेरिया, माली, नाइजर, नाइजीरिया, साओ टॉम एंड प्रिंसेप, सेनेगल, सियरा लियोन, टोगो, बुरुंडी, कोमोरोस, जिबूती, इरिट्रिया, इथियोपिया, केन्या, रवांडा, सेशेल्स, सोमालिया, सूडान, तंजानिया, युगांडा, कैमरून, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, चाड, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, कांगो, इक्यूटोरियल गुनिया, गैबन, अंगोला, वोत्सवाना, लिसोथो, मेडागास्कर, मलावी, मॉरीशस, मोजाम्बिक, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका, स्वाजीलैंड, जाम्बिया और जिम्बाब्वे।

गैर-क्षेत्रीय अशदाता देश: अर्जेंटीना, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चीन, डेनमार्क, फिनलैण्ड, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, कोरिया गणतंत्र, कुवैत, नीदरलैण्ड, नॉर्वे, पुर्तगाल, सऊदी अरब, स्पेन, अविदन, स्विट्ज़रलैंड, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका।

अफ्रीकी विकास बैंक का राजकीय (state) सहभागी: संयुक्त अरब अमीरात।

उद्मव एवं विकास

संयुक्त राष्ट्र संघ के ईसीए के तत्वावधान में नौ अफ्रीकी देशों की एक विशेषज्ञ समिति ने अफ्रीकी विकास बैंक (एएफडीबी) गठित करने के लिये समझौता प्रारूप तैयार किया। 1968 में आयोजित अफ्रीकी वित्त मंत्रियों के सम्मेलन में इस समझौते को औपचारिक रूप से अपनाया गया तथा 1964 में यह समझौता लागू हुआ। बैंक ने 1966 में कार्य करना शुरू किया।

आरम्भ में केवल स्वतंत्र अफ्रीकी देश ही इस बैंक के सदस्य हो सकते थे। 1982 में गैर-अफ्रीकी देशों को भी इसकी सदस्यता प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

उद्देश्य

इस बैंक का मुख्य उद्देश्य है- सदस्य देशों में व्यक्तिगत तथा सामूहिक दोनों स्तर पर आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति लाना।

अफ्रीकन विकास बैंक समूह का उद्देश्य निर्धनता कम करने, अफ्रीकी लोगों के लिए जीवन दशाओं को सुधारना और महाद्वीप के आर्थिक एवं सामाजिक विकास हेतु संसाधनों का प्रयोग करने में मदद करना है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, संस्थान का उद्देश्य अफ्रीकी देशों को- वैयक्तिक एवं सामूहिक रूप से- सतत् आर्थिक विकास एवं सामाजिक प्रगति प्राप्त करने में उनके प्रयासों में मदद करना है। गरीबी से लड़ते हुए सतत् आर्थिक विकास प्राप्ति के लिए प्रयास करना महाद्वीप का मुख्य कार्य है। इसके अंत में, बैंक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए आंतरिक एवं बाह्य की उत्प्रेरित एवं गतिशील करने के साथ-साथ अपने क्षेत्रीय सदस्य देशों की तकनीकी एवं वित्तीय मदद भी प्रदान करता है।

संरचना

बैंक का सर्वोच्च नीति-निर्धारक अंग है- गवर्नर बोर्ड। एक गवर्नर और प्रत्येक सदस्य देश द्वारा मनोनीत एक वैकल्पिक गवर्नर इस बोर्ड के सदस्य होते हैं। प्रत्येक सदस्य की आवंटित मतों की संख्या पूर्व-निर्धारित होती है। प्रत्येक शेयरधारी के लिये एक अतिरिक्त मत की व्यवस्था है। बैंक के निर्णय सामान्यतः बहुमत के आधार पर लिये जाते हैं। गवर्नर बोर्ड के अधिकांश अधिकारों को निदेशक बोर्ड में प्रत्यायोजित कर दिया गया है। निदेशक बोर्ड में 18 सदस्य (12 क्षेत्रीय सदस्यों द्वारा तथा 6 गैर-क्षेत्रीय सदस्यों द्वारा निर्वाचित) होते हैं। निदेशक बोर्ड बैंक के दैनिक कार्यों के लिये उत्तरदायी होता है। बैंक का अध्यक्ष, जो बोर्ड का सभापति भी होता है, निदेशक बोर्ड के द्वारा पांच वर्षों के लिये निर्वाचित होता है। बैंक में पांच उपाध्यक्ष भी होते हैं।

गतिविधियां

एएफडीबी के अधीन छह संस्थाएं हैं, जिनके माध्यम से लोक एवं निजी पूंजी का प्रवाह नियंत्रित किया जाता है। ये छह संस्थाएं हैं- अफ्रीकी विकास कोष (एडीएफ); नाइजीरिया न्यास कोष (एनटीएफ), अफ्रीका पुनर्बीमा सहयोग (एमआरसी), द सोसाइट इन्टरनेशनले फनैन्सियेर पौर लेस इन्वेस्टीसेमेंट्स एट ले डेवलपमेंट एन आफ्रिके (the Societe Internationale Financiere pour les Investissements et le Developpementen Afrique–SIFIDA);  अफ़्रीकी विकास वित्त संस्था (Association of African Development Finance Institution— AADFI), तथा, शेल्टर-आफ्रिके (Shelter-Afrique)।

1972 में बैक की सॉफ्ट विंडो (softwindow) के रूप में एडीएफ का गठन किया गया। एडीएफ से सम्बद्ध हो जाने के फलस्वरूप बैंक निवेश के लिये कोष-स्रोतों का और अधिक विस्तार करने में सक्षम हुआ, क्योंकि एडीएफ की स्थापना के समय से ही गैर-अफ्रीकी सदस्यों द्वारा इसकी सदस्यता ग्रहण करने का प्रावधान था। अतः गैर-क्षेत्रीय सदस्यों द्वारा दी गई धनराशि का उपयोग अफ्रीका प्रायद्वीप के विकास के लिये किया जा सका। एडीएफ के माध्यम से ही विकास परियोजनाओं, व्यवहार्यता (feasibility) अध्ययनों, आदि के लिये रिआयती दर पर वित्त उपलब्ध कराया जाता है।

एनटीएफ की स्थापना अफ्रीकी विकास बैंक और नाइजीरिया सरकार के मध्य 1976 में हुये एक समझौते के आधार पर हुई। यह मुख्य रूप से मौलिक क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं के लिये रियायती दर पर वित्तीय सहायता प्रदान करता है। ऋण लम्बी अवधि के लिये तथा कम ब्याज दर पर उपलब्ध कराये जाते हैं।

अफ्रीका पुनर्बीमा सहयोग संघ, जिसकी स्थापना 1977 में हुई तथा जिसका मुख्यालय नाइजीरिया में है, बीमा तथा पुनर्बीमा गतिविधियों तथा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय उत्तरदायित्व (underwriting) क्षमताओं को प्रोत्साहन देता है।

स्विट्जरलैंड अवस्थित एसआईएफआईडीए (सीफिडा) का गठन 1970 में हुआ। यह अफ्रीका में उत्पादक उद्यमों के गठन और विकास को प्रोत्साहन देता है। सीफिडा के शेयर धारक हैं- एएफडीबी, आईएफसी तथा विश्व की कई अन्य वित्तीय, औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थाएं।

एफडीएफआई क्षेत्र के विकास बैंकों को परियोजना निर्माण एवं पोषण में सहायता प्रदान करता है। 1975 में गठित यह संघ कोट डी' आइवरी में स्थित है।

शेल्टर- अफ्रीके सदस्य देशों की आवास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। 1982 में गठित शेल्टर-अफ्रीके केन्या में अवस्थित है।

विकास परियोजनाओं को ऋण प्रदान करने के अतिरिक्त, एएफडीबी निजी क्षेत्र को तकनीकी सुविज्ञता, सलाहकारी सेवा तथा वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह क्षेत्र के भीतर और बाहर निजी निवेश को भी प्रोत्साहन देता है। एएफडीबी कई क्षेत्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक, वित्तीय, औद्योगिक और तकनीकी संस्थाओं के साथ घनिष्ठ सम्पर्क रखता है।

40 वर्षों के अपने कार्य संचालन में, एएफडीबी ने 2,885 अभियानों का वित्तीयन किया है, जिसकी कुल लागत 47.5 बिलियन डॉलर बैठती है। वर्ष 2003 में, इसे प्रमुख वितीय रेटिंग एजेंसियों से AAA रेटिंग प्राप्त हुई और इसकी पूंजी 32.043 बिलियन डॉलर है।

यह बैंक वर्तमान में ट्यूनीशिया के ट्यूनिस में है। इसे अबिदजान और कोट डी आइवरी से अस्थिरता के कारण यहां स्थानांतरित किया गया है। अभी तक (मार्च 2014 की स्थिति के अनुसार) इसमें 1050 कर्मचारी हैं। एएफडीबी के 78 देश सदस्य हैं जिसमें 53 देश अफ्रीका के और 25 देश अमेरिकी, यूरोपीय एवं एशियाई देशों से हैं।

हालांकि, हाल के वर्षों में एएफडीबी के ऋण प्रदायन में महत्वपूर्ण विस्तार नहीं हुआ है, वर्ष 2006 के आंकड़े प्रकट करते हैं कि स्थितियों में परिवर्तन हो सकता है। 2005 और 2006 के बीच एएफडीबी की ऋण संबंधी गतिविधियों में 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई। इसी समयावधि के दौरान, निजी क्षेत्र के प्रचालन मूल्य में दुगुने हो गए। एएफडीबी के पास अफ्रीका के विकास में नवीन साझेदारी और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अग्रणी होने का जनादेश है। यह जनादेश अफ्रीका में अवसंरचना, क्षेत्रीय एकात्मकता, बैंकिंग और वित्तीय मानकों जैसे क्षेत्रों जैसे वित्तीय एवं विकास संस्थानों में है।

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